- استدراک 1
- کتاب التجاره من المجلد الاول 3
- 1- سوال: 3
- جواب: 3
- جواب: 4
- 4- سوال: 4
- جواب: 4
- 2- سوال: 4
- 5- سوال: 4
- جواب: 4
- جواب: 4
- 3- سوال: 4
- جواب: 5
- 6- سوال: 5
- جواب: 6
- 7 -سوال: 6
- جواب: 7
- جواب: 8
- 9- سوال: 8
- 10 -سوال: 8
- 11- سوال: 8
- جواب: 8
- - 12سوال: 9
- جواب: 9
- 13- سوال: 9
- جواب: 9
- 15- سوال: 13
- 16- سوال: 13
- جواب: 13
- جواب: 13
- جواب: 13
- جواب: 13
- 14- سوال: 13
- 17 -سوال: 13
- جواب: 14
- 20- سوال: 14
- جواب: 14
- جواب: 14
- 21- سوال: 14
- 18- سوال: 14
- 19- سوال: 14
- جواب: 15
- جواب: 19
- 22- سوال: 19
- جواب: 26
- 24- سوال: 26
- 23- سوال: 26
- جواب: 27
- 25- سوال: 27
- جواب: 27
- 26- سوال: 28
- جواب: 28
- جواب: 28
- 27- سوال: 28
- جواب: 30
- 29- سوال: 30
- جواب: 30
- 28 -سوال: 30
- جواب: 30
- 30- سوال: 30
- 31- سوال: 31
- جواب: 31
- 32- سوال: 32
- 35- سوال: 33
- 33 -سوال: 33
- جواب: 33
- 34- سوال: 33
- جواب: 33
- جواب: 34
- 37 -سوال: 36
- 36 -سوال: 36
- جواب: 36
- 38- سوال: 41
- جواب: 41
- 39- سوال: 48
- 40- سوال: 52
- 41 - سوال: 53
- جواب: 53
- جواب: 53
- جواب: 54
- 42- سوال: 54
- 44- سوال: 55
- جواب: 55
- جواب: 55
- 43- سوال: 55
- 45- سوال: 56
- جواب: 56
- 46 -سوال: 57
- جواب: 57
- 47- سوال: 58
- جواب: 58
- 48 -سوال: 59
- 49- سوال: 60
- جواب: 60
- 50- سوال: 60
- جواب: 60
- 51- سوال: 63
- جواب: 64
- 53- سوال: 65
- جواب: 65
- 52- سوال: 65
- جواب: 66
- 55- سوال: 67
- 54- سوال: 67
- جواب: 67
- جواب: 68
- 57- سوال: 68
- 56- سوال: 68
- جواب: 68
- جواب: 69
- جواب: 69
- 59- سوال: 69
- جواب: 69
- 60- سوال: 69
- 61 - سوال: 70
- 62 - سوال: 72
- کتاب التجاره من المجلد الثانی 72
- جواب: بدان که: چون لفظ قبض در کلمات الهی و معصومین (علیه السلام) در احکام شرعیه وارد شده (در بعض جاها به عنوان شرط صحت یا لزوم، مثل رهن و هبه. و در بعض دیگرت 72
- اشاره 72
- جواب: 80
- 63- سوال: 80
- 64 -سوال: 82
- جواب: 82
- جواب: 83
- 65 -سوال: 83
- جواب: 84
- 66 - سوال: 84
- جواب: 84
- 67- سوال: 84
- جواب: 88
- 68- سوال: 88
- جواب: 89
- 69- سوال: 89
- 70- سوال: 90
- جواب: 90
- جواب: 92
- 72 -سوال: 92
- 71- سوال: 92
- جواب: 93
- 73- سوال: 95
- جواب: 96
- جواب: 97
- 74- سوال: 97
- 75 - سوال: 104
- جواب: 105
- جواب: 110
- 76- سوال: 110
- 77 -سوال: 111
- 79- سوال: 111
- 78- سوال: 111
- جواب: 111
- جواب: 111
- 80- سوال: 112
- جواب: 113
- 82 -سوال: 114
- 81- سوال: 114
- جواب: 114
- جواب: 114
- جواب: 116
- 83 - سوال: 116
- 84- سوال: 117
- جواب: 117
- جواب: 118
- 85- سوال: 118
- جواب: 122
- 86- سوال: 122
- جواب: 123
- 88- سوال: 123
- جواب: 123
- 87- سوال: 123
- جواب: 124
- جواب: 124
- 90 -سوال: 124
- 89 -سوال: 124
- 91- سوال: 128
- جواب: 129
- 92- سوال: 131
- جواب: 132
- جواب: 134
- 93- سوال: 134
- 94- سوال: 134
- جواب: 135
- 95- سوال: 135
- 97 -سوال: 136
- جواب: 136
- 98- سوال: 136
- 96- سوال: 136
- جواب: 136
- جواب: 137
- 99- سوال: 141
- جواب: 141
- 101- سوال: 142
- جواب: 142
- 100- سوال: 142
- جواب: 142
- 102- سوال: 152
- جواب: 153
- 104- سوال: 153
- 103- سوال: 153
- 105 -سوال: 153
- جواب: 153
- 107- سوال: 154
- جواب: 154
- 106- سوال: 154
- جواب: 154
- جواب: 155
- 109- سوال: 155
- 110- سوال: 155
- 108- سوال: 155
- جواب: 155
- جواب: 155
- جواب: 156
- 111- سوال: 159
- جواب: 159
- 112- سوال: 160
- جواب: 160
- 113- سوال: 170
- جواب: 170
- 114- سوال: 171
- 115- سوال: 174
- جواب: 174
- جواب: 175
- 116- سوال: 175
- 117- سوال: 176
- جواب: 177
- 118- سوال: 181
- جواب: 181
- جواب: 191
- 119- سوال: 191
- 120- سوال: 193
- جواب: 194
- 121- سوال: 194
- 122- سوال: 194
- جواب: 194
- جواب: 200
- 124- السوال: 208
- الجواب: 208
- 125 -سوال: 212
- جواب: 212
- جواب: 213
- 127- سوال: 213
- جواب: 213
- 126- سوال: 213
- 128- سوال: 214
- جواب: 214
- جواب: 214
- 129- سوال: 214
- 130- سوال: 215
- جواب: 215
- اشاره 215
- 131- سوال: 216
- جواب: 216
- 132- سوال: 217
- جواب: 217
- 133- سوال: 218
- جواب: 219
- جواب: 220
- 134- سوال: 220
- 135 -سوال: 221
- جواب: 222
- جواب: 224
- 136- سوال: 224
- 137- سوال: 226
- جواب: 226
- 139 -سوال: 227
- جواب: 227
- جواب: 227
- 140- سوال: 228
- جواب: 229
- 141- سوال: 229
- 142- سوال: 229
- جواب: 229
- 143- سوال: 230
- جواب: 231
- 145- سوال: 232
- جواب: 232
- 147- سوال: 232
- جواب: 232
- جواب: 232
- 146- سوال: 232
- جواب: 233
- جواب: 235
- جواب: 235
- 148 -سوال: 235
- 149- سوال: 235
- جواب: 236
- 151 -سوال: 236
- جواب: 236
- جواب: 239
- 152- سوال: 239
- جواب: 242
- 153- سوال: 242
- 154- سوال: 245
- جواب: 245
- جواب: 247
- 155- سوال: 247
- جواب: 248
- جواب: 249
- 157- سوال: 249
- 158- سوال: 250
- 160- سوال: 251
- جواب: 251
- جواب: 251
- 159- سوال: 251
- جواب: 251
- جواب: 252
- 161- سوال: 252
- 163- سوال: 254
- جواب: 254
- 162- سوال: 254
- جواب: 255
- 164- سوال: 259
- جواب: 259
- 165- سوال: 263
- جواب: 263
- جواب: 264
- 166- سوال: 264
- 167 -سوال: 265
- جواب: 266
- جواب: 267
- 168- سوال: 267
- 169- سوال: 336
- جواب: 336
- جواب: 349
- 170- سوال: 349
- 174- سوال: 357
- جواب: 358
- جواب: 358
- 172- سوال: 358
- 173 -سوال: 377
- جواب: 377
- 174- سوال: 382
- 175- سوال: 383
- جواب: 383
- جواب: 384
- 176- سوال: 384
- 177 -سوال: 386
- جواب: 386
- 178 -سوال: 386
- جواب: 400
- 179- سوال: 400
- جواب: 428
- 180- سوال: 428
- 181- سوال: 430
- 182 -سوال: 430
- جواب: 430
- جواب: 430
- 183- سوال: 430
- جواب: 431
- جواب: 445
- جواب: 446
- 186- سوال: 446
- 185- سوال: 446
- جواب: 446
- 187- سوال: 447
- جواب: 447
- جواب: 448
- 188- سوال: 448
- جواب: 449
- 189- سوال: 449
- 190- سوال: 449
- جواب: 449
- جواب: 452
- جواب: 452
- 192- سوال: 452
- 191- سوال: 452
- 193- سوال: 452
- 194- سوال: 453
- جواب: 453
- جواب: 453
- 195- سوال: 454
- 196- سوال: 454
- جواب: 454
- جواب: 454
- 197- سوال: 457
- جواب: 457
- 200- سوال: 458
- جواب: 458
- 199- سوال: 458
- جواب: 458
- 198- سوال: 458
- جواب: 459
- 202 -سوال: 459
- 201- سوال: 459
- 203 -سوال: 460
- جواب: 460
- جواب: 460
- جواب: 461
- 204- سوال: 461
- جواب: 463
- 205- سوال: 463
- 206- سوال: 464
- جواب: 464
- 207- سوال: 466
- جواب: 468
- 208- سوال: 468
- 209- سوال: 471
- جواب: 471
- جواب: 472
- 210- سوال: 472
- جواب: 473
- 211- سوال: 473
- 213- سوال: 489
- جواب: 489
- جواب: 489
- 214- سوال: 489
- جواب: 489
- جواب: 490
- جواب: 490
- 216- سوال: 490
- 217- سوال: 490
- جواب: 490
- 215- سوال: 490
- جواب: 491
- 219- سوال: 491
- 218 -سوال: 491
- جواب: 491
- 221- سوال: 492
- جواب: 492
- جواب: 493
مبتنی باشد بر فسخ تقاص اولا، وایجاب بیع ثانیا. (1) بلی، هر گاه بعد از اطلاع بعد از بیع، بگوید که الحال فسخ تقاص، کردم و طلب زوجه را از مال خود میدهم و بیعی که کرده ام الحال اجازه میکنم چون الحال مال من شده. گاه هست که باعث صحت بیع شود. لکن اظهر این است که چنین اجازه نفعی در تصحیح فضولی نداشته باشد. چون اصل متزلزل بودن ملکیت تقاص ضعیف است. پس این تفریع ضعفی است در ضعف.
137- سوال:
137- سوال: هر گاه کسی مبایعه کرده باشد با کسی. واز مشتری مطالبهء ثمن مبیع کند، مشتری می تواند در جواب به عنوان عموم بگوید که تو " از من چیزی نمیخواهی - یا - من مشغول ذمهء تو نیستم " یا اینکه جواب باید مطابق سئوال باشد و باید بگوید که " از باب ثمن مبیع از من چیزی نمیخواهی " و همچنین هر گاه جواب را مطابق بگوید آیا جایز است قسم را به عنوان عموم یاد کند که " تو حقی بر من نداری " یا نه؟ -؟.
جواب:
جواب: بلی، جایز است جواب منکر به عنوان عموم. زیرا که گاه هست که مبیع را خریده در عوض طلبی که از بایع داشت. یا آنکه ثمن را داده. و اگر بگوید داده ام بینه ندارد که اثبات کند. پس جایز فرار از جواب خاص، به اعم. به جهت اینکه آن هم افادهء مطلوب می کند. بلی، هر گاه جواب اعم، نفع نکند در آنجا اکتفا نمی توان کرد، مثل اینکه زوجه ادعای زوجیت کند و زوج بگوید که مستحق چیزی نیستی بر من. و خواهد اسقاط نفقه و مهر کند، در اینجا اکتفا نمی شود زیرا که ثمرات زوجیت نفقه و مهر تنها نیست. و از جمله ثمرات آن میراث بردن است، و آن به جواب اعم، تمام نمی شود. و در صورتی که جواب را مطابق بگوید و قسم را بر اعم بخورد. اظهر در آن نیز جواز است. چون افادهء مطلب می کند. و در اینجا هم باید ملاحظهء آن معنی را کرد که از بابت دعوی زوجیت نباشد.